इस अधिनियम को आधिकारिक रूप से प्रेस और नियतकालिक पत्रिका रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2023 के नाम से जाना जाता है। यह 01 मार्च, 2024 से प्रवृत्त हुआ।

यह अधिनियम संपूर्ण भारत देश में लागू होता है।

इस अधिनियम के लिए माननीय राष्ट्रपति की सहमति 28 दिसंबर, 2023 को प्राप्त हुई और इसे राजपत्र में 29 दिसंबर, 2023 को अधिसूचित किया गया।

इस अधिनियम के संदर्भ में, "अधिसूचना" से अभिप्राय ऐसी अधिसूचना से है जो भारत के राजपत्र या किसी राज्य के राजपत्र में प्रकाशित की गई हो। "अधिसूचित करना" तथा उसके व्याकरणिक रूपांतर और समजात अभिव्यक्तियों का अर्थ भी इसी के अनुरूप समझा जाएगा।

“प्रेस महापंजीयक से अभिप्राय उस अधिकारी से है जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा धारा 5 की उपधारा (1) के अंतर्गत नियुक्त किया गया हो।

इस अधिनियम के “समाचार पत्र” से नियतकालिक पत्रिका के खुली तह किए हुए पन्ने अभिप्रेत हैं, जिनको प्राय: अखबारी कागज पर दैनिक या कम से कम सप्ताह में एक बार मुद्रित किया जाता है, जिनमें वर्तमान घटनाक्रम, लोक समाचार या लोक समाचारों पर टिप्पणियां अंतर्विष्ट होती हैं ।

“नियतकालिक पत्रिका” से कोई प्रकाशन अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत समाचार पत्र है, जिसका प्रकाशन और मुद्रण नियमित अंतरालों पर किया जाता है, जिसमें लोक समाचार या लोक समाचारों पर टिप्पणियां अंतर्विष्ट होती हैं, किंतु इसके अंतर्गत कोई पुस्तक या पत्र, जिसमें वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षिक प्रकृति की पुस्तक या पत्र भी सम्मिलित हैं, नहीं आती है।

“प्रकाशन” से आवधिक रूप से मुद्रित और भारत में प्रकाशित समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पत्र या संवाद-पत्र अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत लोक वितरण या पहुंच के लिए इलैक्ट्रानिकी रूप में उसका पुनरुद्धारण या कोई प्रकाशन संघ, प्रतिकृति संस्करण सम्मिलित है।

किसी प्रकाशन के “प्रतिकृति संस्करण” से विदेशी प्रकाशन के मूल संस्करण का अंग्रेजी या संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किसी भारतीय भाषा में सटीक पुन: प्रकाशन अभिप्रेत है।

“जर्नल” से किसी पत्रिका से भिन्न आवधिक प्रकाशन अभिप्रेत है, जिसमें मुख्यतया किसी विशिष्ट विषय या वृत्ति से संबंधित शैक्षिक, वैज्ञानिक या तकनीकी अंतर्वस्तु होती है।

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