विदेशी आवधिक तथा अनुलिपि संस्करण के लिए दिशा-निर्देश

  • समाचारों तथा सामयिक घटनाओं से संबंधित विदेशी समाचारपत्रों तथा आवधिकों का प्रकाशन।
  • विदेशी समाचारपत्रों के अनुलिपि संस्करणों का प्रकाशन।

केन्द्र सरकार ने-

  • समाचारों तथा सामयिक घटनाओं को प्रकाशित करने वाली भारतीय इकाइयों में मान्य्ता प्राप्त एफ.आई.आई. द्वारा कुल मिलाकर प्रदत्त इक्विटी पूंजी का 26% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (इनमें एन आर आईज, पी आई ओज द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश शामिल है) तथा पोर्टफोलियो निवेश की अनुमति देने का निर्णय लिया है। कुछ शर्तों के अधीन अच्छे स्तर तथा अंतर्राष्ट्रीय आधार वाली विदेशी इकाइयों को ही ऐसे निवेश की अनुमति है।
  • विदेश समाचारपत्रों की भारतीय इकाइयों द्वारा विदेशी निवेश के साथ अथवा उसके बिना, पूर्ण अथवा आंशिक रूप से तथा मूल समाचारपत्रों के स्वामित्व वाली विदेशी कंपनियों द्वारा भी, बशर्ते कि वे कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत भारत में पंजीकृत तथा निगमित हों, अनुलिपि संस्करणों की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
  1. आवेदन
    • वांछित दस्तावेज के साथ विधिवत् रूप से भरे निर्धारित प्रपत्र की नौ प्रतियां सूचना और प्रसारण मंत्रालय में जमा करना होंगी ।
    • 5000/- रू का आवेदन शुल्क डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से वेतन एवं लेखा अधिकारी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, नई दिल्ली को देय होगा।
  2. प्रकाशन का शीर्षक

    विद्यमान प्रक्रिया के अनुसार, अनुलिपि संस्करणों सहित शीर्षक सत्यापन प्रेस पंजीयक द्वारा किया जाता रहेगा।

  3. पात्रता मानदण्ड 
    समाचारों तथा सामयिक घटनाओं से संबंधित समाचारपत्रों तथा आवधियों को प्रकाशित करने वाली भारतीय इकाइयों में विदेशी निवेश :

    1. विदेशी निवेश की अनुमति तभी दी जाएगी जब परिणामी इकाई(अब जिसे ‘नई इकाई’) एक ऐसी कंपनी हो जो कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी के पास पंजीकृत हो।
    2. विदेशी इकाइयों, एन.आर.आई. पी आई ओ इत्यादि द्वारा एफ डी आई सहित विदेशी निवेश तथा मान्यता प्राप्त एफ आई आई द्वारा पोर्टफोलियो निवेश को नई इकाई को प्रदत्त इक्विटी के 26% तक की अनुमति दी जाएगी।
    3. नई इकाई में, अनुमति केवल उन मामलों में दी जाएगी जहां सबसे बड़े भारतीय शेयरधारक द्वारा धारित इक्विटी कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 4 ए में यथा उल्लिखित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा लोक वित्तीय संस्थाओं द्वारा धारित इक्विटी को छोड़कर प्रदत्त इक्विटी का कम से कम 51% हो। इस उपबंध में प्रयुक्त सबसे बड़े भारतीय शेयरधारक शब्द4 में निम्न का कोई एक या उनका संयोजन सम्मिलित होगा:-
      • व्यक्तिगत शेयरधारक के मामले में,
        • व्यक्तिगत शेयरधारक
        • कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 6 के अनुसार शेयरधारक को रिश्ते‍दार
        • एक कंपनी/कंपनियों का समूह जिसमें व्यतक्तिगत शेयरधारक/एच यू एफ जिससे वह संबंधित हैं, के पास प्रबंधन तथा नियंत्रण का स्वार्थ है।
      • भारतीय कंपनी के मामले में,
        • भारतीय कंपनी
        • समान प्रबंधन तथा स्वामित्व नियंत्रण के अधीन भारतीय कंपनियों का समूह। 
           

          बशर्ते कि उक्त उप-खंड (1) तथा (2) में उल्लिखित सभी सम्मिलित रूप से अथवा कोई एक इकाई, नई इकाई के मामलों को व्यवस्थित करने हेतु प्रत्येक पार्टी कानूनी समझौता कर एकल एकक के रूप में कार्य करेंगी।

    4. नई इकाई की इक्विटी में 26% विदेशी निवेश को परिकल्पित करते समय, विदेशी धारक घटक, यदि कोई हो, तो नई इकाई में कुल विदेशी धारक को जानने के लिए नई इकाई की भारतीय शेयरधारक कंपनियों को इक्विटी में अनुपातिक आधार पर गिनना होता है।
    5. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का कम से कम 50% नई इक्विटी जारी कर शामिल किया जाएगा। शेष अर्थात् प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के 50% तक विद्यमान इक्विटी के हस्तांतरण के माध्यम से शामिल किया जाए।
    6. यह अनुमति नई इकाई के निदेशक मंडल के 3/4 निदेशकों तथा सभी मुख्य कार्यकारी एवं संपादकीय स्टाफ के भारतीय निवासी होने का निर्भर करेगी।

    विदेशी समाचारपत्रों का अनुलिपि संस्करण:

    • विदेशी समाचारपत्रों के अनुलिपि संस्करण को प्रकाशित करने को इच्छुक, विदेशी निवेश करने वाली अथवा उसके बिना किसी भी भारतीय इकाई अथवा मूल विदेशी समाचारपत्र के स्वामित्व वाली किसी भी विदेशी कंपनी को अंशत: या पूर्णरूपेण अपने समाचारपत्र के अनुलिपि संस्करण छापने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते कि,
      • यह, कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत कंपनी के रूप में कंपनी के रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत तथा निगमित हो।
      • भारत में उसका मुख्य व्यवसायिक स्थल होने के साथ-साथ भारत में वाणिज्यिक रूप में विद्यमान हो ।
      • नई इकाई के निदेशक मंडल के 3/4 निदेशक तथा सभी कार्यकारी एवं संपादक मंडल भारतीय निवासी हों।
    • भारत में विदेशी समाचापत्र के अनुलिपि के संस्करण को प्रकाशित करने वाली किसी भी इकाई पर वही संगत कानून तथा दिशा-निर्देश लागू होंगे जो भारतीय समाचापत्रों तथा उनके प्रकाशकों पर लागू होते हैं।
  4. मूल शर्ते/दायित्व:
    • निर्धारित सीमा की शर्तों के अधीन, सभी इकाइयों का यह दायित्व है कि वह विदेशी शेयरधारकों के पैटर्न में किसी भी प्रकार के बदलाव को प्रत्येक वर्ष की 31 मार्च तथा वित्तीय वर्ष की समाप्ति के 15 दिन के भीतर सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सूचित करें।
    • सभी इकाइयों का यह दायित्व है कि वे उपरोक्त खण्ड 3 ए(iii) में उल्लिखित सबसे बड़े भारतीय शेयरधारक की हिस्सेदारी में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अनुमति लेंगी।
    • सभी इकाइयां अपने निदेशक मंडल में अथवा मुख्य कार्यकारिणी सदस्यों तथा संपादकीय स्टॉफ के किसी भी बदलाव के 15 दिन के भीतर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सूचित करेंगी बशर्ते कि इस बदलाव की कार्योत्तर स्वीकृति सूचना और प्रसारण मंत्रालय से ली गई हो।
    • सभी इकाइयों को अपनी नई इकाई में किसी विदेशी/एन.आर.आई. को सलाहकार (अथवा किसी अन्यं पद पर) एक वर्ष 60 दिनों से अधिक और अथवा नियमित नियुक्ति/तैनाती के प्रस्ताव की पूर्वानुमति सूचना और प्रसारण मंत्रालय से लेनी होगी।
    • निम्नलिखित शर्तों के अधीन अनुलिपि संस्करण की अनुमति दी जाएगी:
      • मूल विदेशी समाचारपत्र जिसका अनुलिपि संस्करण भारत में निकाला जाना है, का प्रकाशन मूल देश के नियामक प्राधिकारी के अनुमोदन से किया जा रहा है तथा उस देश में एक स्टैंडर्ड प्रकाशन है तथा वह विशेष रूप से भारतीय पाठकों के लिए नहीं बनाया गया है
      • अनुलिपि संस्कारण किसी भी रूप में भारतीय पाठकों को ध्यान में रखते हुए कोई विज्ञापन नहीं देंगे।
      • अनुलिपि संस्कारण में कोई स्था‍नीय समाचार/भारत विशेष से संबंधित समाचार न हो जो साथ-साथ विदेशी समाचारपत्र के मूल संस्करण में प्रकाशित हुआ हो।
      • अनुलिपि संस्कारण के प्रकाशन हेतु सूचना और प्रसारण मंत्रालय से पूर्वानुमति ली गई हो तथा शीर्षक का पंजीकरण भारत के समाचापत्रों का कार्यालय (आर.एन.आई) में किया गया हो।
      • प्रकाशन यह स्पष्ट उल्लेख करे कि प्रकाशन पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से अनुलिपि संस्करण है तथा उसमें मुख्य शीर्ष, संपादक पृष्ठ और मूल विदेशी समाचारपत्र का प्रकाशन स्थल स्प्ष्ट रूप से छपा हो।
  5. आवेदनों पर कार्रवाई :
    • समाचापत्रों तथा सामयिक मामलों से संबंधित समाचारपत्रों तथा आवधिकों को प्रकाशित करने वाली भारतीय इकाइयों में विदेशी निवेश के लिए सभी नए आवेदनों और विदेशी समाचारपत्रों के अनुलिपि संस्करण के प्रकाशन के प्रस्ताव पर कार्यवाही और निर्णय, गृह मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों के अंतर्मंत्रालयी परामर्श, जैसा भी जरूरी हो, के आधार पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
    • आवेदन करते समय आवेदक इकाई शेयरधारक समझौता तथा ऋण समझौता जिन्हें अंतिम रूप दे दिया गया है अथवा दिए जाने का प्रस्ताव है, का पूरा उल्लेख करें। बाद में, इनमें किसी भी प्रकार का बदलाव किए जाने पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को ऐसे बदलाव के 15 दिन के भीतर सूचित कर दिया जाए।
    • आवेदक निर्धारित पात्रता मानंदडों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए नियम/संगम ज्ञापन तैयार करे।
    • सभी इकाइयों को, ऐसे सभी व्यक्तियों के लिए जो भारत के निवासी नहीं हैं तथा जिन्हें नई इकाई के निदेशक मंडल में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है, सूचना और प्रसारण मंत्रालय से पूर्व स्‍वीकृति लेनी होगी।
    • अनुलिपि संस्करण के प्रकाशन के लिए सभी आवेदनों को यह स्पष्ट उल्लेख करना होगा कि वे अनुलिपि संस्क‍रण का प्रकाशन पूर्ण अथवा आंशिक रूप से करेंगे। ऐसे मामलों में जहां मूल विदेशी समाचारपत्र का केवल एक भाग प्रकाशित करने का प्रस्ताव है वहां प्रत्येक पृष्ठ को एक भाग के रूप में लिया जाए तथा प्रकाशित किए जाने वाले मूल विदेशी समाचारपत्र की सही पृष्ठ संख्या उल्लेख करें।