- पी आर बी अधिनियम, 1867 के प्रावधानों के अनुसार समाचार पत्र तथा आवधिकों के शीर्षक सत्यापन संबंधी आवेदन निर्धारित प्रपत्र में जिला के संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के माध्यम से भेजा जाना चाहिए।
- सामान अथवा समरूप शीर्षक एक राज्य में किसी भी भाषा में सत्यापित नहीं किया जायेगा अथवा।
- किसी विद्यमान शीर्षक के समान अथवा समरूप कोई भी शीर्षक उसी भाषा में पूरे भारत में सत्यापित नहीं किया जायेगा।
- किसी भी भाषा में विदेशी शीर्षक के समान अथवा समरूप शीर्षक का सत्यापन विदेशी शीर्षक के स्वामी के साथ वैध अनुज्ञप्ति समझौता की प्राप्ती पर ही किया जायेगा।
- आवेदकों/ स्वामियों को सुझाव दिया जाता है कि:
- इच्छुक प्रकाशकों के लिये खरीद फरोख्त तथा ब्लाकिंग से बचने के लिए आवेदक उनके नाम से सत्यापित शीर्षक को पहले पंजीकृत करवा ले फिर अधिक शीर्षकों के लिए आवेदन करें।
- बडी संख्या में आवेदन न करें।
- विद्यमान शीर्षकों के साथ प्रस्तावीत विकल्पों की जांच पीआरजीआई की वेबसाइट पर “शीर्षक खोज “ मीनू में करें।
- आवेदक/स्वामी विदेशी शीर्षकों सबंधी समान/ समरूपता की जांच इंटरनेट सर्च माध्यम से भी कर सकते हैं।
- चॅुकि पीआरजीआई केवल मुद्रित प्रकाशनों को केवल पंजीकृत करती है इसलिए निम्न के लिए आवेदन ना करे:
- सामाचार एजेंसियों के लिए पंजीयन,
- नाटयरूपक एजेंसियों
- केवल कोचिंग सामग्री वाले प्रकाशनों अथवा
- iv) प्रकाशनों के इलेक्ट्रॅानिक संस्करण जिसमें डॅाट कॅाम, डॅाट इन, पोर्टल, फेसबुक, ट्वीटर, ऑरकुट, लिंक्ड, यु टुयुब, याहू गूगल विकीपीडीया विकीलीक्स इत्यादि।
- आवेदन में निम्न बातों का स्पष्ट उल्लेख हो:
- अधिकतम पांच शीर्षक विकल्प (अंग्रेजी तथा हिंन्दी के अलावा जहां तक संभव हो अन्य भाषा के लिए शीर्षकों का अर्थ अंग्रेजी में हो)
- उसकी भाषा
- आवधिकता
- स्वामी का नाम
- प्रकाशन का स्थान तथा
- आवेदक का पता/संर्पक संख्या/ई मेल पता।
- यदि आवेदन में एक से अधिक भाषा का उल्लेख हो तो यह समझा जायेगा कि आवेदन द्वि भाषी/बहु भाषी के लिए किया गया है तथा तदनुसार सत्यापित किया जायेगा।
- यदि प्रत्येक भाषा में अलग अलग प्रकाशन निकाले जाने हैं तो अलग अलग आवेदन किया जाना अनिवार्य है।
- द्विभाषी/बहुभाषी प्रकाशनों में समाचार/लेख उन सभी भाषाओं में होना चाहिए जिनमे शीर्षक सत्यापन किया गया हो भिन्न भाषाओं में प्रकाशित विज्ञापनों को केवल बहुभाषी प्रकासन के रूप मे स्वीकर नहीं किया जायेगा।
- यदि विद्यमान प्रकाशन का नया संस्करण उसी भाषा में उसी राज्य के किसी अन्य जिला से प्रकाशित किये जाने के लिए पहले से शीर्षक सत्यापन करवाना अनवार्य नहीं है। प्रकाशक सीधे ही घोषणा पत्र दाखिल कर आवश्क दस्तावेज पी आर जी आई में पंजीयन संख्या तथा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जमा कर सकते हैं तथापि यदि प्रस्तावित नया संस्करण किसी अन्य राज्य अथवा अन्य भाषा मे है (समान अथवा अन्य राज्य), तो पहले शीर्षक सत्यापन करवाना अनिवार्य नही है।
- यदि स्वामी एकल है तो वे स्वयं आवेदन करेगा।
- संबंधित जिला मजिस्ट्रेट द्वरा अग्रेषित आवेदन में निम्न अवश्य हो।
- स्पष्ट नाम
- मुहर तथा
- तारीख तथा संदर्भ संख्या सहित सबंधित मजिस्ट्रेट का हस्ताक्षर
- शीर्षक सत्यापन के लिए किसी भी रूप में अवेदनो पर विचार नही किया जायेगा।
- प्रसतवित प्रकाशन में मुख्य रूप से निम्न निहित होना चाहिए।
- सामाचार/विचार/लेख इतियादि
- इसके अलावा विज्ञापन अथवा अन्य सूचना हो सकते हैं।
- अतएव/एडवरटीजमेंट क्लसिफइड टेंडर कैलेंडर पंचांग मेटरीमोनियल येलो पेजेज अथवा डयरेक्टरी (अवेदन में प्रस्तावित भाषा में अथवा उसका अर्थ किसी अन्य भाषा में) केवल उनके व्यवसायिक मंसा तथा एसे प्रकाशनो मे आम तौर पर सामाचार/विचार/लेख इतयादि आम तौर पर नही होते है, को ध्यान में रखते हुए सत्यापित नहीं किया जायेगा।
- आवेदक पाठको के मन में किसी प्रकार के भ्रम से बचने के लिए अवेदन अपना नाम (पूर्ण आंशिक) शीर्षक विकल्प के रूप में नहीं दे।
- स्वामी संगठन का नाम तथापि शीर्षक विकल्प पूर्ण या आंशिक भाग हो सकता है।
- आवेदकों को सलाह दिया जाता है कि पत्रिका के लिए व्यक्तिगत नाम से अवेदन ना करें, परन्तु संगठन के नाम पर करें जिसके पक्ष मे अधिकारित अनुसंधान आधारित प्रकाशन प्रस्तावित हैं।
- चूंकी पी आर जी आई किताबों का पंजीयन नहीं करता है इसलिए बुक, शब्द समाहीत शीर्षक विकल्प के लिए अवेदन ना करें।
- इसी प्रकार चैनल शब्द समाहित शीर्षकों के लिए अवेदन ना करे इससे किसी टी वी चैनल से जूडे होने का भ्रम से बचा जा सकता है।
- सरकारी संगठनों को छोडकर गजेट शब्द समाहित शीर्षकों के लिए आवेदन नही किया जाना चाहिए।
- आवेदकों को यह सलाह दिया जाता है कि शीर्षकों में संक्षिप्त अक्षर का प्रयोग ना करे क्यों कि एक संक्षिप्त अक्षर के पूर्ण रूप में कई अर्थ होते है जिससे पाठको में भ्रम हो सकता है इसके अलावा दो पूर्ण शब्दों के बीच भारतीय अंको का प्रयोग ना करें संक्षिप्त अक्षर के साथ अंक जैसे बी टू बी जैसे शब्दों से बचे।
- प्राथमिकता के आधार पर आबंटित किये जाने वाले शीर्षक के निम्न मामलो के अलावा शीर्षकों का अबंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जायेगा।
- जब आवेदक विदेशी शीर्षक के मामले में सूचना और प्रासारण मंत्रालय से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हों।
- न्यायलय अथवा किसी सांविधिक प्राधिकारी के निदेश के मामले में, जो कि बाघ्या हैं तथा यह निर्णय लिया जाता है कि इस निदेश/आदेश के खिलाफ अपील नहीं किया जायेगा।
- अन्य सभी मामले मे जिसका निर्णय प्रेस पंजीयक द्वारा लिया जाता है।
- एसे मामले जब आवेदक शीर्षक के लिए अवेदन करता है तथा उसे विसंगति पत्र जारी किया जाता है तब शीर्षक को एक महीने के लिए ब्लॉक/रोक लिया जाता है तथा विसंगति पत्र जारी करने के दो सप्ताह के भीतर आवेदक को जवाब देने के लिए कहा जाता हैं।
- सरकारी स्कीम सरकारी संगठन विदेशी सरकारी संगठन, संस्थान प्रमुख ट्रेड मार्क्स प्रमुख ब्राण्ड लैण्ड मार्क तथा प्रमुख व्यक्तियों के समान अथवा समरूप शब्दों वाले शीर्षक का सत्यापन नही किया जायेगा क्योकि इससे लोगो में भ्रामकता पैदा होता है अथवा संगठन/संस्थान के नाम का शोषण/दु्रूउपयोग होगा और जिससे ट्रेड मार्क तथा कॉपी राईट का उल्लंघन होगा।
- शीर्षको का सत्यापन नही किया जायेगा यदि वह निम्न से मिलता जुलता हो।
- प्रमुख राष्ट्रीय नेता के नाम अथवा
- सरकारी संस्थानों के प्रमुख
- तथापि केन्द्रीय/ राज्य सरकार के प्रमुख राजनैतिक दलों के नामों पर यथोचित रूप से विचार किया जायेगा।
- कोई शीर्षक जो किसी राष्टीय प्रतीक अथवा नाम के समान अथवा समकक्ष है अथवा केन्द्र या राज्य सरकार के संरक्षण का छाप देता हो अथवा जो किसी स्थानीय अधिकरण अथवा किसी निगम अथवा निकाय अथवा किसी नियम के तहत सरकार द्वारा गठित निकाय, निगम अथवा यू एन इत्यादि जैसे अंतराष्ट्रीय संगठन के साथ कोई संबंध दर्शाता हो तो एसे शीर्षक का सत्यापन “दि एम्बलम एंड नेम्स ऐक्ट (प्रीवेन्शन ऑफ इम्प्रापर यूज), 1950 ‘’ के तहत नहीं किया हो।
- सरकारी विभाग / संस्थान अथवा किसी संघ / संगठन / से संबंधित अवधिक के मामले में स्वामित्व का आवंटन संगठन के नाम पर होगा तथा तदनुसार अवेदक को सलहा दे दी जयेगी।
- शीर्षक का आबंटन नहीं किया जायेगा यदि उनमें निम्न से किसी एक का प्रयोग हो।
- अक्षरों के अलवा कोई चिन्ह
- अभद्र अथवा अर्थ हीन शब्द अथवा
- धार्मिक अधिकस्वर
- जनहित में शीर्षकों का सत्यापन नहीं किया जाना चाहिए यदि निम्न शामिल हों।
- अश्लील अथवा जन संवेदना को चोट पहुंचाने वाला
- नकारात्मक संकेत अथवा चिन्ह अथवा
- अन्य कोई वस्तू जो जनहित रूचि मे ना हों
- दो स्वतंत्र शीर्षक को मिलाकर एक नया शीर्षक बनाना तथा किसी विद्यमान शीर्षक/ शीर्षकों के उद्धरण से बना नया शीर्षक जो मूल रूप से भिन्न न हो तो उसे सत्यापित नहीं किया जाएगा !
- भाषा, प्रकाशन स्थल तथा आवधिकता चाहे कुछ भी हो शीर्षकों को समान माना जाएगा यदि उनमें वही शब्द हैं चाहे वे किसी भी क्रम में हों।
- शहर, राज्य, आवधिकता, भाषा, पूर्वसर्ग/विशेषण, उपपद (ए एन दि) इत्यादि से सम्बन्धित शब्द को किसी विद्यमान शीर्षक के आगे या पीछे लगाकर भिन्न नहीं माना जा सकता है आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले ऐसे शब्द है दि टाइम्स डेली, वीकली, वार्ता, आज, टुडे, एक्सप्रेस, न्यूज, इंडिया, नेशनल, राष्ट्रीय, इत्यादि। ऐसे शब्दों को पहले से सत्यापित शीर्षक के पहले अथवा बाद मैं जोडने से जरूरी नहीं कि शीर्षक के मायने बदल जाएं, इसलिए ऐसे शब्दों को शीर्षकों के आगे अथवा पीछे जोडना समान शीर्षक ही माना जाएगा।
- किसी विद्यमान शीर्षक के आगे अथवा पीछे कोई जातीय (जेनेरिक) शब्द जोडने से विद्यमान शीर्षक की बनावट में मूल परिवर्तन नही होता हो तो ऐसे शीर्षक को विद्यमान शीर्षक के समान माना जाएगा तथापि जातीय (जेनेरिक) शब्द पर मालिकाना हक नहीं समझा जाएगा।
- समान अथवा समकक्ष के संबंध में किसी भी प्रकार की आशंका होने पर प्रेस पंजीयक का निर्णय अंतिम होगा।
ध्यान दें: यह सूची निदर्शी हैं नि:शेष नहीं है!
I read and understood the procedure and guidelines for title application.
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